राणा सांगा और सांप का रहस्य
जैसा कि आपने राणा सांगा की जीवनी से पढ़ रखा है. और यह जानते भी होंगे कि राणा सांगा जिनका नाम महाराणा संग्राम सिंह था.
वह राजपूत वंश के राजा थे और भारत की मध्यकालीन अंतिम शासक थे. उनकी राज्य में भरपूर सुख शांति और साथ ही साथ, अनेक राजाओं को जीतने वाला महान राजा जिसने अपनी एक आंख और एक हाथ होने के बाद भी लड़ाई को छोड़ा नहीं.
मुगल साम्राज्य के "नाको चने चबा दिए". इसी प्रकार से राणा सांगा के बारे में एक ऐसी कथा और एक ऐसा रहस्य निकल कर आता है. जिसे लोग आज भी जिक्र करते हैं.
यह रहस्य ऐसा था कि राणा सांगा एक जगह विश्राम कर रहे हैं और उनके सर के ऊपर एक सर्प या तो उनकी रक्षा कर रहा है या फिर उनके प्राण लेने वाला है, आइए जानते हैं क्या था उस सर्प का रहस्य?
आखिर क्या हुआ था उस दिन (कहानी):
राणा सांगा के साथ इतिहास के अनुसार, जब एक दिन राणा सांगा अपने सैन्य अभियान के बाद जंगल में आराम कर रहे थे. उसी वक्त जब राणा सांगा ने अपना एक घोड़ा जंगल के पेड़ के पास बांधा और उसके नीचे लेट गए.
जब उन्हें नींद आ गई तो थोड़ी देर में अगल बगल से गुजरते लोगों ने देखा कि राणा सांगा सो रहे हैं और उनके सर के ऊपर एक विशालकाय सर अपना फन फैलाकर उनकी रक्षा कर रहा है.
क्या था इसका कारण?
ऐसा इसलिए माना जाता है क्योंकि यह भविष्यवाणी थी कि जब राणा के भाइयों ने उनके राणा सांगा के ऊपर जब हमला किया. तो उस प्राणघातक हमले से बचने के लिए राणा सांगा अपने भाइयों को ना मारकर, वहां से निकल गए और उस घायल अवस्था में उन्होंने अपने भाइयों को फिर भी अच्छे से रहने का सलाह दिया.
कई दिनों तक भेष बदल कर अपना समय काटते रहे. अपनी उदारता के कारण, जो किस तरफ सनातन धर्म ही देखने को मिलती है. उन्होंने इस रक्षा का प्राण दान ले लिया था.
यही कारण है कि जब उनका एक भाई अल्प समय में ही और अल्पायु में ही वीरगति को प्राप्त हुआ. तो वह भाई अगले जन्म में सर्प बनकर उनकी सदैव रक्षा करता रहा. इसीलिए यह माना जाता है कि राणा सांगा की रक्षा करते हुए सर्प का रहस्य बहुत ही मार्मिक और भावात्मक हैं.
इसी प्रकार के जीवन परिचय नीचे दिए गए है:
इसी प्रकार के जीवन परिचय नीचे दिए गए है:

टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें