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जीने मरने के वादे - प्राची मिश्रा की कविता (स्लोगन)

  जीने मरने के वादे ------ किये थे साथ जीने मरने के वादे वो अब नज़रें मिलाने से भी डरते हैं, जो बसाने चले थे दुनिया नई वो अब मेरी के भी आने से डरते प्राची मिश्रा कवित्री प्राची मिश्रा अपनी कविता में कहती हैं,   कि किसी अपने हाथ से हमने जीने मरने के वादे हजार कर डाले.  लेकिन आज एक ऐसी नौबत आई है जो तुमसे नजरें मिलाने से भी डर लगता है. जिनके साथ हम दुनिया बसाने चले थे,  अब वह हमसे इतनी नफरत करते हैं क्यों मेरी जन्नत के सफर पर आने से भी इंकार कर देते हैं. कवित्री के द्वारा यह बयान की गई कैसी दर्द भरी दास्तां है जो कि दो प्रेमियों के बीच में उनके जीने मरने के बाद है और उनके विश्वास के ऊपर सच है. कवित्री कविता में यह कहा गया है कि दो प्रेमियों के बीच में विश्वास सबसे बड़ी दूर है.  यदि टूट जाती हैं तो आप अपने सबसे करीबी से मिलने की भी कोशिश नहीं कर पाते.

जगिइए और जगाइए - हिंदी स्लोगन

जगिइए और जगाइए - हिंदी स्लोगन जगिइए और जगाइए। देश को आगे बढाइए।। --शैलेन्द्र कुमार मिश्र, (प्रधानाचार्य, कार्यवाहक), सेंट थॉमस इन्टर कॉलेज, शाहगंज,

हिन्दी पर प्रसिद्ध स्लोगन - सर्वश्रेष्ठ नारे (शैलेन्द्र कुमार मिश्र)

हिन्दी पर स्लोगन - सर्वश्रेष्ठ नारे "उम्र थका नहीं सकती, हौसले मिटा नहीं सकती। गर जीतने की जिद हो, परिस्थितियां हरा नहीं सकतीं।।" --शैलेन्द्र कुमार मिश्र