सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

संदेश

जीवनी लेबल वाली पोस्ट दिखाई जा रही हैं

ग्रामीण जीवन के अनुपम चितेरे: मुंशी प्रेमचंद

मुंशी प्रेमचंद - ग्रामीण जीवन के अनुपम चितेरे (जीवन परिचय) -------------------------------------- डा० शिवा मिश्रा प्रेमचंद का जन्म काशी के निकट 'लमही' नामक गांव में 31 जुलाई 1880 को हुआ था। इनका बचपन तथा  आरंभिक यौवन काल ग्रामीण वातावरण में ही बीता था। बचपन में गुजारे गांव के वातावरण का प्रभाव इनके मन मस्तिष्क मैं जीवन पर्यंत किस कदर व्याप्त था, इसकी झलक हमें प्रेमचंद अपनी जुबानी बयां करते हुए बताते हैं- हाय बचपन! तेरी याद नहीं भूलती। वह कच्चा टूटा घर, वह पयाल का बिछौना, वह नंगे बदन, नंगे पाव खेतों में घूमना, आम के पेड़ों पर चढ़ना- सारी बातें आंखों के सामने फिर रही हैं।.... गरम पनुए- रस में जो मजा था, वह अब गुलाब के शरबत में भी नहीं, चबेने और कच्चे बेरों में जो रस था, वह अब अंगूर और खीर मोहन में भी नहीं मिलता। ग्रामीण परिवेश का उल्लेख: बचपन के ग्रामीण परिवेश का रचा बसा मन में गांव का स्वच्छ , सुंदर, शांत चित्र - प्रेमचंद को अपने जीवन भर याद ही नहीं रहा मन को भाता रहा, लुभाता रहा। यही कारण है कि जुलाई 1936 में उपेंद्र नाथ ' अश्क ' के सामने मन की बात जुबान पर आ गई और उन...

डॉ सर्वपल्ली राधाकृष्णन के बारे में हिन्दी निबंध तथा जीवन परिचय

डॉ सर्वपल्ली राधाकृष्णन के बारे सर्वपल्ली राधाकृष्णन के विचार शिक्षक किसी परिचय का मोहताज नहीं होता, लेकिन वह दूसरों के परीक्षा को बनाने में सबसे बड़ा सहायक होता है. शिक्षक समाज का रचयिता होता है.  एक व्यवसाई  पैसे  बनाता है लेकिन एक शिक्षक इंसान बनाता है. मनुष्य को इंसान बनाना या शिक्षा के हाथों में एक मनुष्य को सौंपना यह शिक्षक का कार्य होता है. शिक्षक की सबसे सबसे बड़ा आभूषण उसकी सादगी और लोगों के प्रति सामाजिक उत्तरदायित्व का आकर्षण होता है.  जिस प्रकार से कुम्हार मिट्टी के बर्तनों का निर्माण करता है उसी प्रकार से शिक्षक बच्चों के द्वारा उन्हें शिक्षा पर करके उन्हें एक समाज का निर्माण करता है. जीवन के निर्माण में शिक्षक का सहयोग सबसे अमूल्य है.  डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन ने हमेशा से शिक्षक धर्म का पालन किया और लोगों को शिक्षा के के लिए जागरूक किया एवं उन्हें प्रोत्साहित किया.  सर्वपल्ली  राधाकृष्णन के जीवन के महत्वपूर्ण सारांश  अपने पूरे जीवन काल में उन्होंने अपने जीवन के हर पड़ाव में लोगों को यह संदेश दिया कि लोग उच्च पदों पर रहने के बावजूद...

सूरदास जीवनी - भक्ति भावना, पुस्तकें

सूरदास का जीवन परिचय हिंदी में आपका स्वागत है सूरदास का नाम आते ही हम भक्ति भावना में डूब जाते हैं सूरदास जी वात्सल्य रस के सम्राट हैं और हमेशा से उन्होंने अपने श्रृंगार और शांत रसों की बड़ी ही परिकल्पना के साथ अपने छंदों एवं काव्य में वर्णन किया है सूरदास जी को कृष्ण का सबसे बड़ा भक्त और उसके वात्सल्य रस को प्रकट करने वाला सबसे बड़ा सम्राट बोला जाता है आइए जानते हैं उनके बारे में सूरदास जी का जन्म और प्रारंभिक जीवन सूरदास जी 1498 ईस्वी में रनकता नामक गांव में जन्मे थे यह गांव मथुरा आगरा के बीच स्थित है कई लोगों का यह भी मत है कि सूरदास जी का जन्म से ही नामक गांव में हुआ था और वह अत्यंत ही गरीब ब्राह्मण परिवार से आते थे बाद में सूरदास जब बड़े हुए तो आगरा और मथुरा के बीच गांव घाट पर आकर रहने लगे ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि सूरदास के पिता रामदास जी अपने कार्य एवं कुशलता से गायक थे सूरदास की सबसे बड़ी कमजोरी उनका जन्मांध होना था सूरदास जी बचपन से ही अंधे थे इसी कारण उन्हें कई सारी अपेक्षा और उपेक्षा ओं का सामना करना पड़ता था इसीलिए जब वह बचपन में ही वल्लभाचार्य के शिष्य बने ...

वीरेंद्र सहवाग जीवनी - रिकॉर्ड, क्रिकेट कैरियर, तिहरा शतक (Virender Sehwag Jivani)

वीरेंद्र सहवाग का जीवन परिचय वीरेंद्र सहवाग भारत के भूतपूर्व भारतीय बल्लेबाज रह चुके हैं  वह अपनी आक्रमक बल्लेबाजी के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने अपने जीवन काल में 3 शतक भी लगाया क्योंकि फर्स्ट टाइम किसी भी एकदिवसीय मैचों में सम्मिलित था। वीरेंद्र सहवाग का जन्म स्थान वीरेंद्र सहवाग 20 अक्टूबर 1978 को नजफगढ़ के दिल्ली स्थान में पैदा हुए। उन्होंने अपनी बेहतरीन बल्लेबाजी से नई दिल्ली के क्रिकेट एसोसिएशन में अपना स्थान बनाया। उनके पिता एक अनाज व्यापारी थे। वह बचपन से ही नई दिल्ली में रहे थे। वीरेंद्र सहवाग का बचपन संयुक्त परिवार में, अपने भाई-बहन, अंकल-आंटी और तकरीबन 16 सत्रह से अधिक दोस्तों के साथ बिता। हालांकि, वीरेंद्र सहवाग का परिवार हरियाणा से आता है। किंतु इसके बाद पिता के व्यवसाय के कारण वह लोग नई दिल्ली में आकर बस गए। अपने माता पिता की पूरी परिवार में सहवाग तीसरे नंबर पर हैं। इसलिए शायद उन्होंने तिहरा शतक लगाने का प्लान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बना रखा था। वीरेंद्र सहवाग की बचपन से ही क्रिकेट में रुचि  वीरेंद्र सहवाग का जीवन परिचय उनके क्रिकेट कैरियर ...

पंडित जवाहरलाल नेहरु की जीवनी - भारत के प्रथम प्रधानमंत्री

क्या आप जानते हैं भारत के पहले प्रधानमंत्री कौन थे? अगर नहीं तो आइए जानते हैं, सबसे पहले जवाहरलाल मोतीलाल नेहरू के बारे में। जिनको बच्चे चाचा नेहरू के नाम से भी जानते हैं। यह केवल पंडित जवाहरलाल नेहरु की जीवनी ही नहीं बल्कि समस्त भारत की शुरुआत का पहला अध्याय है। क्या खास था पंडित जवाहरलाल नेहरू की जीवनी में? मुझसे लोग हमेशा पूछते हैं कि, जवाहरलाल नेहरू की जीवनी में ऐसा क्या खास है? जिसके लिए लोग हमेशा उत्सुक रहते हैं। तो इसका बहुत ही साधारण सा जवाब है कि, वह भारत के पहले प्रधानमंत्री के रूप में विराजने वाले तथा स्वतंत्र के पहले प्रमुख राजनीतिक केंद्र बिंदु रहने के कारण। जवाहर लाल नेहरू का जीवन परिचय बहुत ही साधारण नहीं हो सकता। इसीलिए उनके जीवन परिचय और उनकी जीवनी को जानना बहुत ही जरूरी है। जवाहरलाल मोतीलाल नेहरू का जन्म चाचा नेहरु जी का जन्म 14 नवंबर अट्ठारह सौ नवासी, इलाहाबाद में उत्तर प्रदेश के पश्चिमी प्रांत में हुआ। उस वक्त जिस वक्त भारत ब्रिटिश साम्राज्य के अधीन था।  बच्चों की प्रिय, चाचा नेहरू अपने पिता मोतीलाल नेहरू जो कि एक बहुत बड़े बैरिस्टर थे और ...

राणा सांगा की जीवनी (जीवन परिचय)

राणा सांगा (जीवनी) का जीवन परिचय राणा सांगा नाम, एक महाराज, जिसने मेवाड़ की राजनीति में और उसके साम्राज्य को बढ़ाने में अपने सर्वस्य का निर्वाहन किया। राणा सांगा का पूरा नाम महाराणा संग्राम सिंह था. उन्होंने 1448 में जन्म लिया और 17 मार्च 1527 को वीरगति को प्राप्त हुए. राणा सांगा जी उदयपुर में सिसोदिया राजपूत राजवंश के महान राजा थे. किंतु वह अपने पिता राजा रायमल के सबसे छोटे पुत्र थे. राजा रायमल की कुल 3 पुत्र थे जिसमें से पहले कुंवर पृथ्वीराज, जगमाल और फिर राणा सांगा थे. सबसे छोटे होने के कारण राजा रायमल की तीनों पुत्रों के बीच लगातार आपसी खींचातानी होती रहती थी. इसी खींचातानी के कारण कुंवर पृथ्वीराज और जगमाल ने राणा सांगा को मारने की कोशिश भी की. जिससे कि वह मेवाड़ के सिंहासन को प्राप्त कर सकें। इसके ऊपर एक कहानी राजा और सर्प का रहस्य हमने पहले ही बता रखी है कृपया उसे जरूर देखें। मेवाड़ के सिंहासन में राणा सांगा का महत्व ( Rana Sanga Jivani) मेवाड़ के इतिहास में, सिंहासन किल्ली संघर्ष बहुत पहले ही शुरू हो चुका था. इसका जीता जागता सबूत, एक भविष्य कर्ता के अ...