अकबर बीरबल की कहानियां विश्व प्रसिद्ध है उन्हीं में से एक कहानी है जिसे कहते हैं मोम के शेर की कहानी.
एक बार विदेश से एक राजा आया और वह जब राजा अकबर के सामने भी प्रस्तुत करने लगा. तो उसने एक पिंजरे के अंदर शेर को लेके आया.
यह देखकर राजा अकबर काफी भयभीत हो गए लेकिन कुछ ही समय बाद वह काफी निश्चिंत हो गए. क्योंकि वह शेर मोम का बना हुआ था.
ऐसा देखने पर राजा अकबर ने पूछा, कि हे राजन यह बताइए आप इस अद्भुत भेट को हमें क्यों दे रहे हैं और इसका कारण क्या है?
यह सुनते ही वह दूर देश से आया हुआ राजा मुस्कुराने लगा और उसने कहा हमने सुना है. कि आपके पास अनेक रत्न है और उनमें से भी आपके विश्व प्रसिद्ध नवरत्न सबसे अनोखे हैं.
क्या आप को आप के नौ रत्नों पर पूरा भरोसा है कि वह आपके सभी दिए हुए कार्य को कर सकते हैं?
राजा से अनोखा प्रश्न
विदेशी राजा ने राजा बीरबल की भरी सभा में ही, जब यह प्रश्न पूछा तो सभी लोग सब शक पका गए.
क्योंकि राजा अकबर के सामने इस प्रकार की गलती करने का परिणाम सभी जानते थे. उस विदेशी राजा को उसकी इस गलती का परिणाम अपनी जान देकर की भी चुकाना पड़ सकता था.
किंतु वह राजन यहां तो, राजा बीरबल की परीक्षा और राजा अकबर को नीचा दिखाने के लिए ही आया. इसलिए उसका यह प्रश्न कि आप अपने नौ रत्नों पर पूरा विश्वास करते हैं यह बहुत ही साधारण था.
क्या आप इस शेर को पिंजरे से बिना दरवाजा या पिजड़ा खोले हुए बाहर ले आ सकते हैं?
विदेशी राजा की इस अबूझ पहेली को सभी ने समझाने की कोशिश की. किंतु सभी दरबारी और राजा के अनेक रत्न असफल रहे.
इस पर जब राजा बीरबल मुस्कुरा रहे थे. तो विदेशी राजा ने पूछा आप इतना मुस्कुरा क्यों रहे हैं? आपकी हंसी का राज क्या है? मुझे लगता है कि इस पूरी भरी सभा में आप ही सबसे बड़े मूर्ख है, जो कि औरों को मूर्ख समझ रहे हैं.
इस पर तो राजा बीरबल और भी मुस्कुराने और ठहाके लगाने लगे. अब तो राजा अकबर से भी सहा नहीं गया. उन्होंने गुस्सा आते हुए लहजे में कहा, अकबर तुम इतनी हंसी क्यों उड़ा रहे हो? क्या तुम्हें इस शेर को निकालने का तरीका मालूम है? वह भी बिना हाथ लगाए.
राजा अकबर को गुस्से में देख करके बीरबल ने तुरंत अपने हाव-भाव को बदला. और अकबर से कहा राजन आपकी बात पूर्णता सत्य है. कि इस शेर को ऐसे निकालना संभव नहीं है. वह भी बिना हाथ लगाए. किंतु मैं यह काम कर सकता हूं.
बीरबल की सूझबूझ की कहानियां
बीरबल तुरंत अपनी राजगद्दी से उतरते हैं और वह दरबान से उसकी लोहे की सलाखों को गर्म करने के लिए बोलते हैं.
जैसे ही दरबान अपनी गर्म सलाखों को राजा बीरबल के हाथ में देता है. वैसे ही बीरबल उस सलाखों को पिंजरे के अंदर, उस शेर के ऊपर दाग देते हैं.
जिससे वह मोम का शेर पिघलना शुरू हो जाता है. और इस प्रकार से बिना हाथ लगाए और बिना पिंजरे को हाथ लगाए हुए या खुल हुए. वह शेर को बाहर निकाल लेते हैं.
इस प्रकार से राजा अकबर की लाज भी बच जाती है. वह विदेशी राजा अपने आप को शर्मशार महसूस करते हुए राजा बीरबल से क्षमा मांगता है. और अपना 300 एकड़ की जमीन दान करके, राजा बीरबल के नाम कर जाता है. उन्हें शत-शत प्रणाम करता है.
इस प्रकार से राजा बीरबल फिर से अपने बुद्धिमान कहानियों में एक और कहानियों का रचना कर लेते हैं. इस तरह से उनका मान पूरे के पूरे नवरत्नों में और बढ़ जाता है. इसके परिणाम स्वरूप राजा अकबर भी उन्हें दान में 100 बीघा जमीन दे देते हैं.
कहानी का निष्कर्ष
इस कहानी से, हमें यह शिक्षा मिलती है कि हम अगर अपनी बुद्धि का प्रयोग करें. तो हम हमेशा ही बड़ी से बड़ी, मुश्किल से मुश्किल, परिस्थिति में बड़ी आसानी से समाधान निकाल सकते हैं.
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