चालाक लोमड़ी और नादान खरगोश (कहानी)
इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है, लोगों से चालाक रहने के बजाय अपनी समझदारी पर काम लेना एवं उसका इस्तेमाल करना चाहिए.
कहानी की पटकथा:
एक समय की बात है एक चीकू नामक खरगोश रहा करता था. वह बहुत ही शरारती लेकिन लोगों में बहुत लोकप्रिय था. उसकी शरारते भी लोगों को पसंद आती थी क्योंकि वह नटखट के साथ बहुत ही देखने में सुंदर एवं मनमोहक था.
जिस प्रकार कृष्ण को लोग बचपन में उनकी अंखियों के लिए पसंद करते थे उसी प्रकार से लोग चीकू को उसकी शर्तों के लिए पसंद करते थे.
सच्चाई यह भी थी कि चीकू की शर्तों के कारण जंगल की कई सारी जानवर परेशान भी रहते थे लेकिन वह इसे नजरअंदाज करते हैं. उसका मुख्य कारण यह था कि समय-समय पर लोगों की मदद भी किया करता था.
चीकू अपनी फुर्ती के कारण पूरे जंगल में जाना जाता था. चीकू को पकड़ पाना बहुत ही मुश्किल था. इस प्रकार का दावा चीकू स्वयं भी किया करता था. जिसके कारण समय-समय पर और जंगल की जानवरों की बीच में दौड़ हुआ करती थी.
कहानी का दूसरा पाठ:
जहां एक तरफ शरारती चीकू खरगोश था वहीं पर, जंगल में अपनी चला क्यों के लिए मशहूर लोमड़ी जगमोहन रहा करती थी. लोमड़ी जगमोहन हमेशा लोगों के काम में रुकावट पैदा करती थी और लोगों से चढ़ के कारण उनके पास जाकर ने परेशान करती थी.
इसके कारण लोग जगमोहन से दूर रहा करते थे. सच्चाई यह थी कि पूरे जंगल में लोमड़ी का कोई दोस्त नहीं था. कभी-कभी करण जगमोहन परेशान रहा करता था. किंतु स्वभाव से चालक और कुटिल जगमोहन कभी भी बारे में ध्यान देने की कोशिश नहीं करता था.
कभी जगमोहन लोगों की रोटियां चुरा लेता था तो कभी उनके बच्चों को खा जाता था. हालांकि यह जगमोहन के लोमड़ी होने के स्वभाव के कारण था किंतु फिर भी वह अपने आप को बदलना नहीं चाहता था.
जिसके कारण उसको जंगल में कई समस्याओं का सामना करना पड़ता था. यह समस्या इतनी बड़ी हो गई कि पूरे जंगल वासियों से परेशान हो गए और उसे जंगल से निकालने के लिए एकजुट हो गए.
कहानी में मोड़:
जैसा कि हमने जाना कि शरारती चीकू था किंतु वह मन का बहुत ही सरल स्वभाव का था. इसी के कारण वह हमेशा लोगों की मदद करने के लिए उत्सुक रहा करता था. इसी कड़ी में एक दिन जब चालाक लोमड़ी जगमोहन जंगल में घूम रही थी तब उसे शरारती चीकू दिखाई दिया.
जगमोहन लोमड़ी कई दिनों से भूखी थी और उसने अभी तक किसी का शिकार नहीं किया था. जब उसने चीकू खरगोश के मुलायम मांस को देखा तो उसका मन लालच से भर गया उसने युक्ति निकालने की सूची.
उसने देखा कि वह लोगों से अब झपट कर के कोई कार्य नहीं कर सकता था. इसलिए उसने अब कपट का रास्ता अपनाने का सोचा.
जगमोहन और चीकू में दोस्ती:
इसी कारण से जगमोहन ने चीकू से दोस्ती की तरफ हाथ बढ़ाया. चालाक लोमड़ी खरगोश के पास जाती है और कहती है कि उसने कई दिनों से कुछ भी नहीं खाया है.
उसने यह भी दुहाई दी कि आज कई दिनों से लगातार मूसलाधार बारिश हो रही है जिसके कारण उसे अन्य का एक दाना भी नसीब नहीं हुआ है. अपनी आंखों में आंसू भर कर के जब जगमोहन लोमड़ी ने यह बात शरारती और सरल स्वभाव की चीकू को बताई.
तब कोमल हृदय का चीकू खरगोश पिघल गया. उसने तुरंत ही उसे अपने घर में आने के लिए आमंत्रित किया. उसने कहा कि ही चालाक लोमड़ी जगमोहन मैं तुम्हारे बारे में पूरी जंगल से सुन चुका हूं. और मैं तुम पर विश्वास भी नहीं करता हूं किंतु तुम इस वक्त संकट में हो.
तुम्हारी रक्षा करना और तुम्हारी सहायता करना मेरे जितने भी बस में है मैं करूंगा. मैं जानता हूं कि तुम मुझे खाना चाहती हो लेकिन इस वक्त तुम स्वयं संकट में हो.
तो मैं तुम्हारी मदद जरूर करूंगा इसके बाद तुम यहां से चली जाना. ऐसा कहते ही चीकू ने अपने घर से कई सारी खाने की चीजें चालाक लोमड़ी को दी.
लोमड़ी का हृदय परिवर्तन:
यह जानने के बाद किसी को यह जानता है कि जगमोहन उसे खाना चाहता है. फिर भी उसने उसे अपने घर पर आमंत्रित किया और अपनी एकत्रित की हुई चीजों को उसके उसके साथ साझा किया.
ऐसा देखने के बाद जगमोहन लोमड़ी का हृदय परिवर्तन हो जाता है और वह अपना विचार बदल देती है. अब वह सच्चे ह्रदय से चीकू के साथ दोस्ती करने के लिए तैयार हो जाती है.
इसकी बात जब कभी भी किसी भी प्रकार की समस्या होती है तो चालाक लोमड़ी अपने दिमाग का इस्तेमाल करके हमेशा शरारती चीकू को बचाती है.
इस तरह से जंगल में सुख शांति का माहौल फिर से आ जाता है क्योंकि अब चीकू ने एक और चालाक जानवर को सुधार दिया.
कहानी से सीख:
इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है कि हमेशा अच्छे कार्य पर करते रहना चाहिए चाहे भले ही हमें उसका मार्ग और उसका परिणाम पता हो.
अगर चीकू यह जानते हुए भी कि जगमोहन उसे खाना चाहती है नहीं बुलाता तो वह कभी भी जगमोहन का हृदय परिवर्तन नहीं कर पाता.
यह तो समय की मांग थी जिसके कारण जगमोहन का हृदय परिवर्तित हो गया और उसने चीकू को अपने सबसे अच्छे दोस्त के रूप में अपना लिया.
इसीलिए हमें लगातार अपना कार्यकर्ता रहना चाहिए और स्वयं को समझदारी से उपयोग में लाना चाहिए. ईश्वर ने हमें दिमाग का उपयोग किसी लिए करने के लिए दिया है कि हम सही समय पर सही निर्णय ले सके.
हमें उम्मीद है कि इस कहानी से आपको एक अच्छी सीख मिली होगी. आगे से आप भी सच्चे रह का पालन करते हुए लोगों की मदद एवं उनके साथ रहेंगे. धन्यवाद!
टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें