अकबर बीरबल की न्यू कहानी एक नए अंदाज के साथ. अकबर बीरबल की मजेदार पहेलियाँ और रोचक कहानियां, जो की बहुत ही लंबी हुआ करती थी लेकिन लोगों को बहुत ही आनंद आता है.
राजा अकबर के कौवा का प्रेम:
राजा अकबर एक बार अपने बगीचे में घूम रहे थे, उनके साथ उनके चाटुकार मंत्री भी उनके साथ बगीचे का आनंद ले रहे थे.
तभी राजा जिस पौधे को सर्वाधिक प्रिय और सुंदर मानते थे उसके पास जाकर के खड़े हो गए. किंतु जब उन्होंने जाकर के देखा तो वह पौधा टूट चुका था.
इसका मुख्य कारण यह था कि राजा अकबर का माली पौधे काटते वक्त उस पौधे को गलती से काट गया था. जिसकी वजह से वह पौधा खराब हो गया और राजा बीरबल का मन भी दुखी हो गया.
किंतु इस बात को अकबर का माली बता नहीं सकता था इसीलिए उसने एक बहाने और युक्ति की. जब राजा अकबर बीरबल ने उस पौधे के कटने के बारे में पूछा तो अकबर के माली ने तुरंत जवाब देते हुए कहा:
जहांपना कल शाम को कौवा का एक पूरा झुंड आया था. जिसमें पूरे 71 गए थे, उन्होंने हमारे बगीचे को काफी नुकसान पहुंचाया.
यह सुनने के बाद बादशाह अकबर ने कहा कि तुम्हें कौवा और बाहरी तत्वों से हमारे इस सुंदर पौधे की रक्षा करना तुम्हारा धर्म था किंतु तुम या नहीं कर पाए इसलिए अब तुम्हें इसकी सजा मिलेगी. यह सुनकर तुरंत ही मर गया और उसने क्षमा याचना करनी शुरू कर दी.
मौत की सजा:
जहांपना अकबर ने तय कर लिया था कि माली को उसके सुंदर फूल के खराब होने के कारण उसे मौत की सजा दी जाएगी. जब यह बात आपकी तरह पूरे राज्य में फैल गई कि मात्र माली की एक पौधे के खराब हो जाने से माली को मौत की सजा दी जा रही है.
अन्य कानों से होते होते राजा बीरबल तक के कानों तक पहुंची जो कि उस वक्त इस घटना के समय वहां पर नहीं थे.
वह माली जानता था कि उनकी समस्या का निदान केवल बीरबल जी ही कर सकते हैं इसलिए वह शाम को रोते हुए अपनी पत्नी को उनके पास भेजा कि वह उन से दरखास्त कर सकें और उनकी जान की रक्षा कर सकें.
राजा बीरबल जानते थे कि माली झूठ बोल रहा है. उन्होंने माली से कहा कि तुमने झूठ बोला है इसी कारण से तुम्हें सजा मिल रही है.
माली और उसकी पत्नी हैरान थे कि राजा बीरबल कैसे पता चला कि वह झूठ बोल रहा था. जबकि उसे लग रहा था कि उसे मौत की सजा उसके पेड़ काटने की वजह से मिल रही है.
राजा बीरबल ने कहा जैसे ही तुमने कहा कि कौवा गिनती को सही तरीके से अंकित किया तभी मैं समझ गया कि तुम इस प्रकार के बहाने बना रहे हो जिससे कि तुम जहांपना की नजरों में गुनाहगार ना साबित हो.
ऐसा सुनने पर मालिक तुरंत ही गिरा कर रोने लगा और राजा बीरबल के पैरों में गिरते हुए कहा. जहां मुझसे गलती हो गई कृपया मुझे क्षमा करें आगे से इस प्रकार की गलती कभी नहीं करूंगा गलती से काटने की सजा ए मौत होनी चाहिए?
इस पर राजा बीरबल ने कहा बिल्कुल सही कहा बिल्कुल भी किसी तरह का इंसाफ नहीं है. तुम्हारे सजा ए मौत की सजा को कम करवाने की गुजारिश में जहांपना से जरूर करूंगा तुम जाओ और निश्चिंत होकर के सो जाओ.
लेकिन तुम्हें कल सुबह उठते ही एक काम करना पड़ेगा, तुम सुबह उठते ही कहना कि तुमने 9531 कौवा को वह को राजा के दरबार में आक्रमण करने के लिए आते हुए देखा है.
यह बहुत ही विचित्र बात थी किंतु माली राजा बीरबल पर भरोसा करके वह अपने घर को चला जाता है और सुबह बेचैनी के साथ इंतजार करें लगता है.
राजा के दरबार की तरफ आक्रमण:
अगले दिन सुबह जब जहांपनाह अपने दरबार में रहते हैं उसी वक्त, एक दमान दौड़ते हुए राजा के पास सूचना लेकर के आता है कि तकरीबन 9,571 कौवा राजा के दरबार की तरफ आक्रमण करने वाले हैं.
ऐसा सुनते ही जहां बना हंसने लगते हैं और कहते हैं कि यह कैसी बात की कौवा हमारे दरबार पर हमला करें, और यह कौवा सही सही संख्या की गणना करने वाला व्यक्ति कौन है?
ऐसा सुनते ही पूरे दरबार में हंसने लगते हैं तभी राजा बीरबल बहुत ही, शालीन स्वभाव से जहांपना को आगाह कर आते हैं जी हां मैंने 9531 कौवा को दरबार में आते हुए देखा है. मैं आपको यह ज्ञान कराने ही वाला था कि तब तक दरबान आ गया.
बीरबल के बोलते ही पूरे राज्य दरबार में हड़कंप मच गया. क्योंकि लोग जानते थे कि राजा बीरबल कभी झूठ नहीं बोलते और उनकी किसी भी प्रकार की गणना गलत नहीं होती.
ऐसा सुनने पर स्वयं जहांपना भी भयभीत हो गए और उन्होंने कहा कि क्या बीरबल तुम पागल हो गए हो ?कौवा की घटना को सही प्रकार से कैसे कर सकता है?
इस पर राजा बीरबल ने चुनौती देते हुए कहा, जी हां जहां पर ना मैं कर सकता हूं क्या इस दरबार में कोई और ऐसा है जो कि कौवा सही सही संख्या की गणना कर सकता हो?
इस प्रकार मंत्रियों ने सोचा कि यह एक ऐसा मौका है जबकि बीरबल को नीचा दिखाया जा सकता है और उनका मंत्री पद लिया जा सकता है. इसी कारण से एक चाटुकार मंत्री ने बताया कि हां वह कौवा की सही-सही गलती कर सकता है अगर कोई उसे देखें तो अत्यंत चतुराई के साथ उनकी गणना करके जहां बना को सूचित कर देगा.
ऐसा करती ही राजा बीरबल और जहांपना दोनों हंसने लगे. जहांपना जानते थे यह सब राजा बीरबल की चाल थी.
राजा के दरबार की युक्ति:
उन्होंने राजा बीरबल से कहा, बीरबल बताओ तुम क्या चाहते हो मुझे पता है कि यह सब तुम्हारी ही युक्ति है.
इस पर राजा बीरबल ने मुस्कुराते हुए जहां बनाते कहा जिस प्रकार से अपने मालिक को झूठ बोलने पर सजा-ए-मौत देने की सजा का ऐलान किया था उसी प्रकार से क्या अब हम इस मंत्री को इसके झूठ बोलने पर सजा-ए-मौत देने की कष्ट करेंगे?
ऐसा नहीं क्योंकि वह भी पूरे राष्ट्र समाज के लिए उतना ही जरूरी है जितना कि एक माली इसीलिए मेरी आपसे विनती है कि उस माली को इस राज दरबार की सेवा करने का मौका दें और उसे जीवन प्रदान करें.
क्योंकि कौवा सही गिनती कोई नहीं कर सकता, किंतु लोग एक काम जरूर कर सकते हैं कि वह झूठ छोड़ दे.
ऐसा सुनते ही जहांपना मुस्कुराने लगे और उन्होंने माली के सजा को माफ कर दिया जिससे कि उनकी दरियादिली के बारे में पूरे राज्य में बढ़ाया होने लगी और राजा बीरबल प्रसिद्ध.

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