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चींख रहा है सारा भारत - बिक्रम सिंह ( नारायण) की कविता

 ~ चींख रहा है सारा भारत

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जहर दवा दर्द का कब होता है?
गोद से पटक तो नहीं देती माँ,
बालक जब जोर जोर से रोता है।
जहर दवा दर्द का कब होता है ?

कौन सुनेगा चीत्कार आम लोगों की,
कौन समझेगा पीड़ा मेहनतकश मजदूरों की,
चारों तरफ कभी न खत्म होने वाला शोर है।
ढल तो जाती यह काली रात कब की,
पर छाए चुनावी बादल घनघोर है।

आने दो वक्त चुनाव का,
महामारी हवा हवाई हो जाएगी।
गांव शहर में उधार के दिमाग वाला,
जिंदाबाद मुर्दाबाद के नारे लगाएगा।

टूट जाएंगे सारे ताले चाहे वोल्टास के हों या लिंक के,
उठ जाएंगी शटर खद्दरधारी कार्यलयों की,
चाहे लगीं रहें दोनों पट
विद्यालयों की।

विकराल समय यह बड़ा भयंकर,
चींख रहा है सारा भारत
निरकुंश हाथों में दबकर।
त्राहिमाम त्राहिमाम कर रहा है कण कण......अतिवाद व साम्राज्यवाद की लपटों में जलकर।

हे परम पिता परमेश्वर....अब तो बस कर...
अब तो बस कर।

बिक्रम सिंह " नारायण "

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