दुश्मनी निभाने का
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भावार्थ:
कवि यह कहना चाहता है कि लोग जब हम से दोस्ती निभाते हैं तो उनका अंदाज एकदम निराला होता है लेकिन जब मैंने कैसे दुश्मन के साथ समय बिताया जिसकी दुश्मनी निभाने का अंदाज भी बहुत निराला है.
वास्तव में कभी यह बात अपने प्रेमी के लिए कहता है, जब उसका प्रेमी उसके दिल को दुख आता है और उसकी जख्मों पर नमक सकता है. क्योंकि वह उसके बारे में सब कुछ जानता है जो कि कोई और नहीं जानता. इसीलिए जब वह से दुश्मनी करता है तो वह उसके छोटे से छोटे और बड़े से बड़े दर्द को उखाड़ देता है.
इसीलिए कभी कहता है कि आप बिल्कुल किसी पुरानी फिल्म के दुश्मन की तरह नहीं दिखते हो बल्कि आप एक बहुत ही सुशील कुमार वाले चेहरे से व्यक्तित्व किस सम्राट के धनी हो. लेकिन आपने हमारे साथ ऐसा क्यों किया कि आपको हमारे साथ दुश्मनी निभाने का मौका मिला.
जब मैंने आपको लिफाफे के अंदर तो मुझे पता चला कि वह लिफाफा मेरे लिए नहीं था वह लिफाफा तो किसी और के लिए था लेकिन आपने लिफाफे क्यों पर हमारा नाम लिखा.
आपने हमें जलाने के लिए इतने सारे तर्क वितर्क और बहाने किए ऐसा तो कोई दुश्मन भी किसी के साथ नहीं करता.
यह एक दर्द भरी कहानी जिसको कवि ने अपनी कविता के द्वारा संकलित किया है अत्यंत सराहनीय.
कविता
वाह क्या खूब अंदाज है यार हमसे दुश्मनी
निभाने का
आप वैसे तो बिल्कुल नहीं जैसे दिखते हो ।
लिफाफे के अंदर खत किसी और के नाम
का मिला ।
लिफाफे के ऊपर पता हमारा लिखते हो ।
जगदीश तपिश

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