पहली बारिस का पानी! --------------------------- प्रचंड गर्मी के बाद मिलने वाली सबसे पहली बारिश, लोगों के लिए सुकून होती है. मनुष्य का तन मन प्रसन्न हो जाता है. मजा आता है की पहली बारिश के पानी में झूम झूम कर अपनी सभी भावनाएं व्यक्त करें. इसी प्रकार से गर्मी के बाद होने वाली पहली बारिश ने सभी का मन मोह लिया. इसी पर कवि ने कुछ पंक्तियां आप सभी के समक्ष प्रस्तुत की है. भावार्थ: कवि कहना चाहता है कि बारिश का पहला पानी, जीवन मिलने के जैसा है. जब मनुष्य का तन मन गर्मी से बेहाल हो जाता है, तब उस समय जब बरखा ऋतु आती है. कविता बरखा का बरसा झम झमा झम झम झम झम झम पहला पानी! मिल गईं हो जैसे सब को जिंदगानी। धुले-धुले से हैं सब पेड़-पत्ते दिखते-- हंसते-हंसते मुस्काते। ठंडी-ठंड़ी हवा बह रही धीमे-धीमे!रस्ते-रस्ते। गांव-गली सब पानी-पानी खेत बाग वन की भी देखो दिखती आज अजब कहानी! पहली बारिस का बरसा पानी। गरमी-गरमी!जो शोर मचाते ठंडी हवा का अब सुख पाते! हरियाली दिखती मन भावन, शहर-गांव लगते सब पावन। ट्रैक्टर ले किसान जुट गए, खेतों में भगवान डट गए। धान की बेहन देखो पड़ गई सीमा पर देखो,सेना डट गई।। बच्चे! बूढ...

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