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सोने का मोर की कहानी - (समझदार मनमोहन)

समझदार मनमोहन की कहानी - सोने का मोर

समझदार मनमोहन की कहानी - सोने का मोर 


एक दूर गांव में एक बुजुर्ग महिला अपने इकलौते पोते के साथ रहा करती थी. वह हमेशा अपने बच्चे को सुलाने के लिए मनमोहक कहानियां सुनाएं करती थी. 

कई बार इन कहानियों में सच्चाई अभी हुआ करती थी. हालांकि यह कहानियां उस बच्चे को वीर और प्रेरणादायक बनाने के लिए होती थी. 

इसी प्रकार से एक बार एक कहानी को सुनाते हुए उस बुजुर्ग महिला ने अपने पोते को एक सोने की मोर के बारे में बताया. 

क्या था सोने का मोर? 


एक बार महिला जब अपने पोते को सुलाने के लिए कहानियां सुना रही थी. 

उसी वक्त उसके पोते ने पूछा: दादी मां, मुझे कोई ऐसी कहानी सुनाओ जो कि मुझे बड़ा होकर के काफी सहायता प्रदान करें. 

ऐसा सुनने के बाद दादी मां मुस्कुराई और उन्होंने कहानी सुनाना शुरू किया. उन्होंने बताया कि जंगल के बीच, पेड़ों के बीच, एक सोने का मोर रहता है. यदि कोई भी उसे प्राप्त कर ले तो हमेशा के लिए अमीर और सुखी हो जाएगा. 

ऐसा सुनते ही पोते की आंखें चमक उठी. उसने तुरंत पूछा है दादी मां मैं अभी जाकर के बीच देख सकता हूं. 

ऐसा सुनते ही दादी हंसने लगी और उन्होंने कहा, उन्हें साधारण आंखों से देखना और खोजना अत्यंत मुश्किल है. क्योंकि अगर ऐसा होता तो दुनिया के हर व्यक्ति सुखी होते. 

इसीलिए तुम उसको भी देख सकते हो जब तुम बड़े हो जाओ. और अपने आप को इस काबिल बनाओ कि वह स्वयं तुम्हारे सामने आ जाए. 

ऐसा सुनते और समझाते ही उनका पोता मान गया और अब वह सोने के मोर के बारे में मन में सुखी होने का भाव सोचकर सो गया. 

दादी मां के साथ सुनहरा बचपन: 


इसी प्रकार से पोते का अपनी दादी मां के साथ सुनहरा बचपन बीत गया. बचपन में दादी मां के साथ बहुत सुनहरी कहानियां सुना करता था और अपनी रातें, उन सभी सुहानी कहानियों के बीच बताएं करता था. 

किंतु अब वह समय आ चुका था जब उसकी दादी पूरी हो चुकी थी और उनकी हालत अच्छी नहीं थी. लगातार शरीर से स्वस्थ रहने के कारण उसकी दादी मां का देहांत हो गया. 

अब मनमोहन पूरी तरह से अकेला था. किंतु उसकी दादी मां ने उसे अनेक प्रकार के हुनर सीखा रखे थे. जिसके कारण वह अपनी दिनचर्या पूरी कर लेता था. 

किंतु दादी मां की कहानियां और उनकी कमी उसे अभी भी गलती थी. पूरी तरह से अनाथ मनमोहन अपने जीवन यापन के लिए अलग-अलग कौशल को अपनाकर. एवं उनसे अपना जीवन यापन करता था. 

सोने की मोर की खोज: 


लगातार रोज रोज एक ही काम करते रहने से मनमोहन बोर हो चुका था. वह लगातार अकेले भी रह रहा था जिसके कारण उसे अब उस घर में रहना अच्छा नहीं लग रहा था. 

किसी दिन उसे अपनी दादी मां की सोने की मोर की कहानी की याद आती है. यह वह समय था जब उसकी माली हालत काफी कमजोर थी. 

उसके पास खाने के लिए अनाज और सोने के लिए पर्याप्त जगह भी नहीं बच रखी थी. उसके पास रोजगार की कमी थी इसी कारण अब वह अपनी दादी मां को भरपूर याद कर रहा था. 

याद करते वक्त जब उसे सोने की मोर की बात याद आई तो उसने सोचा कि यहां बैठे रहने से तो अच्छा है कि मैं सोने की मोर की खोज करो और अपना जीवन खुशी से बताऊं. 

यही सोचकर उसने सोने की मोर की खोज की शुरुआत की. उसने सीधे जंगल की तरफ रुख किया. 

जंगल में लंबा सफर 


मनमोहन ने सोच कर के कि सोने का मोर मिल जाएगा जो कि उसकी दादी मां ने उसे बचपन में बताया था. अपनी जंगल के लंबे सफर की शुरुआत शुरू की. 

इस सफर में उसे कई दिन लगे, लेकिन उसे सोने का मोर कहीं पर भी दिखाई नहीं दिया. घनघोर बरसात, ठंडी, गर्मी और अनेकों प्रकार के कठिन रास्तों का सफ़र उसने तय किया. 

जंगल की शुरुआत से लेकर के आखिरी तक उसने सारी कोनेको छान मारा. किंतु अभी भी उसे सोने का मोर नहीं दिखाई दिया. 

अब हताश होने लगा था कि क्या सच में उसकी दादी मां ने सही कहा था. क्या सच में अब सोने की मोर की खोज करना उसका सही कदम था? 

यह सोचते हुए जब वह ताश एक पेड़ के नीचे बैठा था और एक गांव से गुजर रहा था. तभी उसने देखा कि उसका जो जूता है वह पूरा फट चुका था.

जंगल के पेड़ों से जूतों की बनाई

जंगल के पेड़ों से जूतों की बनाई 


उसे जंगल में और सफर तय करने के लिए अपने जूतों को सही करना जरूरी था क्योंकि उसके पुराने जूते खराब हो चुके थे. 

अपने पुराने समय में जब वह दादी के साथ रहा करता था. तो उसने जूते बनाने की गलत लिखी थी. इसीलिए उसने कुछ पेड़ों को चुना और उन पेड़ों से छाल उतार ली. 

उन छालों और लताओं से उसने एक बहुत सुंदर जूता अपने लिए तैयार कर लिया जो बहुत ही मजबूत और मनमोहक था. 

अब जब वह उन जूतों को पहनकर के जंगल में चलना शुरू किया तो उसे किसी भी प्रकार की कठिनाई नहीं हो रही थी. 

इसी प्रकार से रास्ते में चलते हुए उसे एक गांव में एक व्यवसाई मिलता है. व्यवसाई देखता है कि उसे चलने में बड़ी कठिनाई हो रही है. 

किंतु जब मनमोहन को उसके जूतों के साथ देखता है. तो अत्यंत खुश हो जाता है और वह सोचता है कि काश ऐसा ही जूता उसके पास भी होता. 

ऐसा सोचते ही उस व्यवसाई ने मनमोहन को बीच में रोका, और उससे पूछा कि बेटा तूने जूते कहां से मिले? मेरे पैरों में छाले पड़ चुके हैं और अब मैं और ज्यादा आगे सफर तय नहीं कर सकता. 

मुझे इस वक्त जूतों की सख्त जरूरत है क्या तुम जहां से इन जूतों को लिया है वहां से मेरे लिए भी एक ले आ सकते हो. 

इतना सुनते ही मनमोहन हंसने लगता है और कहता है यह जूते तो मैंने खुद ही जंगल से तैयार किए हैं. कुछ समय पहले मेरी स्थिति आपके जैसी ही थी. 

मेरे जूते इतने पुराने और फट चुके थे कि मैं उनसे चल नहीं सकता था. इसीलिए मैंने जंगल की छाल और पेड़ों की छड़ों से इस जूते को तैयार किया. 

ऐसा सुनते ही व्यवसाई की आंखें चमक उठी, उसने तुरंत अपने दोनों हाथ जोड़ते हुए मनमोहन से कहा बेटा क्या तुम मेरे लिए एक जूते बना सकते हो? 

इतना सुनते ही मनमोहन ने तुरंत हां कर दी और उसने तकरीबन 2 घंटे के अंदर एक बहुत ही सुंदर जूता तैयार कर दिया. 

इसके बाद व्यवसाई ने उसका बहुत धन्यवाद किया और उसे कुछ पैसे भी दिए. पैसों के साथ-साथ उस वक्त उसे खाने पीने की चीजें और कुछ कपड़े भी दिए. 

इससे मनमोहन अत्यंत खुश हो गया और उसे लगा कम से कम कुछ समय के लिए उसका गुजारा हो जाएगा. 

भयानक ठंडी का मौसम Image

भयानक ठंडी का मौसम: 


इसी तरीके से जंगल में चलते वक्त काफी समय बीत गया. लेकिन मनमोहन अभी तक उस सोने की मोर की कुछ नहीं कर पाया था. 

इसी कारण से वह बहुत ही परेशान रहने लगा किंतु धीरे-धीरे वह भयानक ठंडी के मौसम में प्रवेश कर चुका था. इसीलिए उसके सारे पुराने कपड़े जो वह अपने साथ लेकर आया था उसका इस भयानक ठंडी के मौसम में इस्तेमाल नहीं हो पा रहा था. 

अपनी जान संकट में देख कर, अपनी दादी के सिखाएं हुए नुस्खे और तरीकों से फिर से इस बार मनमोहन ने पेड़ की छाल से एक बहुत ही सुंदर कोट तैयार किया जिससे वह ठंडी से बच सकता था. 

कुछ ही घंटों के भीतर मनमोहन ने फिर से एक बहुत ही, लुभावना एवं सुंदर जैकेट तैयार कर लिया था. अपने सपोर्ट में उसने रंग बिरंगे फूल लगा लिए थे. 

जिसके कारण और भी मनमोहक दिख रहा था. इसे पहन कर उसे अब बिल्कुल भी ठंडी नहीं लग रही थी और अब वह ज्यादा अच्छा महसूस कर रहा था. 

जैकेट को बनाने के बाद भी, मनमोहन उदास था क्योंकि जैसा कि वह चाहता था कि सोने का मोर मिल जाए अभी तक नहीं मिला था. 

ऐसा सोच करके उसने फिर से चलना शुरू किया, चलते हुए भाई गांव में पहुंचा जहां पर बहुत सारे किसान अपनी किसानी कर रहे थे. 

उन्हीं में से एक किसान ने उसके कोर्ट को देखा, और वह दौड़ता हुआ उसके पास आया. किसान ने कहा बेटा तुम्हारे या जैकेट तो बहुत ही सुंदर है हम इस वक्त भयानक ठंडी में अपने खेतों में काम कर रहे हैं क्योंकि हमारी मजबूरी है. 

लेकिन हमें तुम्हारी जैसी ही पहने हुए एक अच्छे जैकेट की जरूरत है. या तो हमें बताओगे कि तुमने यह कहां से लिया था कि हम भी जाकर के ले सके क्योंकि अब यदि हम इसको नहीं लेते हैं तो हमारी जान जा सकती है. 

ऐसा सुनते ही मनमोहन फिर से हंसने लगता है, कहता है कि यह जैकेट तो उसने खुद जंगल की छालों से तैयार किया हुआ है. 

ऐसा सुनते ही किसान की आंखें भी चमक होती हैं और बहुत से आग्रह करता है, कि वह जल्द से जल्द ऐसी ही एक जैकेट्स के लिए तैयार कर दें. 

इतना सुनने के बाद मनमोहन बहुत ही जल्दी से 10 से 12 जैकेट्स सभी किसानों के लिए तैयार कर देता है. 

उसे अच्छे पैसे भी मिलते हैं, और वह कई दिन उस गांव में रहता भी है सुकून के साथ. धीरे-धीरे अब वह सोने की मोर की खोज को छोड़ना चाहता है . 

वापस घर की तरफ लौटना 


जैसे ही वह वापस घर की तरफ लौटने की कोशिश करना शुरू करता है. उसी रास्ते में वही किसान और उसी प्रकार के व्यवसाई मिलते हैं. 

और उससे उसी प्रकार के सुंदर जूते और टिकाऊ जैकेट की मांग करते हैं. मनमोहन वहीं पर रुक कर के जंगल के छालों से सुंदर जूते और टिकाऊ जैकेट्स बनाता है. 

उसका यह व्यवसाय वहां पर चल पड़ता है और उसे काफी लाभ होता है. धीरे-धीरे उसे यह महसूस होता है कि जो उसकी दादी ने कहा था कि जंगल में सोने का मोर रहता है इसका मतलब यह नहीं कि सचमुच में कोई सोने का मोर होगा. 

जबकि सच्चाई यह थी कि सोने का मोर उसकी खुद की ताकत, और उसका हुनर था. 

जैसे ही उसे यह सच्चाई समझ में आती है वह सभी लोगों की मदद करता है और उसके बाद अपने गांव वापस लौटता है. 

गांव वापस लौटने के बाद वह अपनी एक दुकान शुरू करता है जिसमें वह तरह-तरह के सुंदर जूते और जैकेट्स की अच्छी दुकान लगाता है. 

अब उसकी दुकान पर बहुत ही भीड़ रहती है. और वह धीरे-धीरे एक बहुत बड़ा व्यवसाई और एक सुखी व्यक्ति हो जाता है. 

कुछ समय बाद वह अपनी प्रियतमा के साथ शादी कर लेता है, उसके बच्चे होते हैं और वह अपनी दादी मां की कहानी अपने बच्चों को भी सुनाता है. 
कहानी से सीख Image


कहानी से सीख 


इस कहानी से हमें क्या सीख मिलती है कि हमें अपने पर भरोसा रखना चाहिए. असली में सोने का मोर हमारा हुनर ही होता है जो कि हमें सच्चा सुकून और खुशी प्रदान करता है. 

यदि आपने हुनर है तो आप कहीं पर भी खा कमा सकते हैं. यदि आप में कुशलता है तो आप लोगों में उनकी जरूरत की चीजों को मुहैया करा सकते हैं. 

इसीलिए हमेशा किसी शॉर्टकट के बजाय, अपनी क्षमता पर पूरा विश्वास करें! 

धन्यवाद.

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