हमने महाराणा सांगा के बारे में उनका जीवन परिचय एवं उनकी कहानियां और उनके युद्ध के बारे में बहुत कुछ सुना है.
लेकिन क्या हम महाराणा सांगा के पुत्र के बारे में कुछ जानते हैं? चलिए जानते हैं:
महाराणा सांगा जी का जन्म मेवाड़ में हुआ और वह महाराणा उदय सिंह के पिता एवं महाराणा प्रताप के दादा जी थे. उनका नाम आज पूरे राजघराने में सबसे ऊंचा है.
उनकी वीरता की कहानियां पूरे विश्व में विख्यात है कि कैसे उन्होंने युद्ध में अपने शरीर के छिन्न-भिन्न हो जाने के बाद भी हार नहीं मानी.
महाराणा सांगा के पुत्रों का नाम
1. भोजराज
2. विक्रमादित्य
3. महाराणा उदय सिंह
महाराजा भोजराज और मीराबाई के पति के रूप में उनका पद
महाराणा सांगा के सबसे बड़े जेष्ठ पुत्र थे भोजराज. यह मीराबाई के पति के रूप में सबसे विख्यात है. जैसा कि हम जानते हैं कि मारना सांगा और मीराबाई की कहानियां विश्वविख्यात है कि कैसे उन्होंने मीराबाई को कृष्ण की लीलाओं का ज्ञान करने से रोकने की कोशिश की.
क्योंकि वह नहीं चाहते थे कि एक पतिव्रता स्त्री, किसी और पुरुष के बारे में सोचें या उसका गुणगान करें. हम जानते हैं कि मीराबाई के दोहे एवं उनके गाने आज इतिहास के पन्नों में दर्ज है.
जैसा कि हम जानते हैं कि मीराबाई ने अपने राधा कृष्ण भजन से पूरे विश्व का मन मोह लिया और भक्ति का एक अलग स्वरूप प्रदान किया. उसी प्रकार से महाराणा सांगा के पुत्र भोजराज ने राज्य का आभार एवं पद संभाला. उन्होंने मेवाड़ को एक उचित व्यवस्था एवं शासन प्रणाली प्रदान की.
राणा सांगा के पुत्र के रूप में विक्रमादित्य
यह द्वितीय पुत्र तथा सबसे काबिल सेनानी थे जिन्होंने मेवाड़ की रक्षा के लिए अपने पिता की भांति अपना सर्वस्व निछावर कर दिया.
राजपूताना इतिहास आज भी इनके लिए कृतज्ञ है क्योंकि इन्होंने, अपनी पत्नी बच्चों एवं अपनी स्वयं की छांव की कुर्बानी देकर के मेवाड़ की रक्षा के कार्य को पूरा किया.
महाराणा उदयसिंह एवं उनके पुत्रों की कहानियां
महाराणा सांगा के सबसे छोटे पुत्र थे किंतु इन्होंने अपनी वीरता से इतिहास के परचम लहरा दिया. यह स्वयं तो महान थे ही साथ ही साथ उनके दो पुत्र हुए जिनका बखान इतिहास अपने हर पन्नों में शामिल करता है.
महाराणा उदय प्रताप सिंह के दो पुत्र हुए जिनका नाम था महाराणा प्रताप एवं दूसरे पुत्र हुए शक्ति सिंह. महाराणा प्रताप की ख्याति पूरे विश्व में सबसे अलग है. उन्होंने मेवाड़ की रक्षा के लिए, अपने पूर्वजों की भांति वीरता की कहानियां लिखी और अनेकों युद्ध लड़े और जीते.
महाराणा प्रताप तो स्वयं प्रसिद्ध थे ही साथ ही साथ उनका घोड़ा चेतक भी आज भी बच्चों की कहानियों में सबसे स्वर प्रमुख है. इसके साथ ही साथ उनके छोटे बच्चे जिनका नाम शक्तिसिंह था उस वंशज के शक्तावत कहलाते थे.
वर्तमान समय में महाराणा मेवाड़ श्री अरविंद जी एवं युवराज श्री लक्ष्यराज सिंह जी इस वक्त राजपूताना कमाल संभाल रहे हैं.




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